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    National covid 19 panel chief reacts on surge of corona cases in india


    हिमानी चांदना, नई दिल्ली: भारत में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच नेशनल कोविड-19 सुपर मॉडल कमेटी (National Covid-19 Super Model Committee) के चीफ एम विद्यासागर ने कहा है कि, देश में रोजाना आने वाले कोरोना (Corona) के मामलों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने की जरुरत नहीं है. क्योंकि इसका कोई मतलब नहीं है और इसके आधार पर लॉकडाउन (Lockdown) या अन्य नियमों को लेकर नीतिगत फैसले नहीं लिए जा सकते हैं. News18 से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस वायरस के संक्रमण को रोकना असंभव है क्योंकि यह बार-बार इम्युनिटी को प्रभावित कर देता है.

    आईआईटी हैदराबाद के प्रोफेसर डॉ एम विद्यासागर के अनुसार, ओमिक्रॉन वेरिएंट के कारण कोरोना संक्रमण के मामले बढ़े हैं लेकिन इससे पैदा हुए हालात को लेकर ज्यादा परेशान होने की आवश्यकता नहीं है. उन्होंने बताया कि ओमिक्रॉन, कोरोना वायरस का एक अति संक्रामक वेरिएंट है जो वैक्सीन से निर्मित हुई इम्युनिटी को भी प्रभावित कर देता है और व्यक्ति को दोबारा से संक्रमित कर देता है.

    डॉ एम विद्यासागर ने कहा कि, कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को लेकर हमें स्कूल, ऑफिस बंद करने या लॉकडाउन लगाने के संबंध में नीतिगत निर्णय लेने से बचना चाहिए. उन्होंने News18 से कहा कि देश में कोविड-19 के मामले इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि लोग वायरस से अपना बचाव नहीं कर रहे हैं लेकिन इसकी गंभीरता से जुड़े मामले नहीं दिख रहे हैं. इसे ऐसा माना जा सकता है कि सर्दियों के दौरान लोगों को सर्दी-जुकाम हो रहा है.

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    उन्होंने कहा कि वायरस का संक्रमण होगा इससे परेशान होने की जरुरत नहीं है. लॉकडाउन लगाने से संक्रमण पर लगाम नहीं लगेगी. बल्कि इससे लोगों की परेशानी बढ़ेगी और जनता भयभीत होगी. ऐसी परिस्थिति में रोजाना आने वाले कोरोना संक्रमण के मामले ज्यादा होंगे लेकिन इसका कोई मतलब नहीं होगा. क्योंकि आप वायरस से संक्रमित होंगे लेकिन किसी बीमारी से नहीं.

    डॉ एम विद्यासागर ने कहा कि अब तक का डाटा दर्शाता है कि ओमिक्रॉन, डेल्टा वेरिएंट की तरह ही संक्रामक है. वहीं दूसरी ओर देश की 70 से 100 फीसदी आबादी में विकसित नेचुरल इम्युनिटी को यह वेरिएंट प्रभावित कर देता है. दरअसल इस वायरस से बचने के लिए सुरक्षा कवच का अभाव होने से संक्रमण के मामले बढ़े हैं.

    अस्पताल में भर्ती होने और ऑक्सीजन सपोर्ट की जरुरत कम रह सकती है

    साउथ अफ्रीका में ओमिक्रॉन वेरिएंट की वजह से आई कोरोना की चौथी लहर का डाटा शेयर करते हुए डॉ विद्यासागर ने कहा कि, इस दौरान दक्षिण अफ्रीका में अस्पताल में भर्ती होने की दर 12 प्रतिशत रही जबकि भारत में यह दर 3.5 फीसदी और ब्रिटेन में उससे भी कम 1 प्रतिशत है.

    वहीं भारत में ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता 1.3 फीसदी है. इसका मतलब यह है कि 1 हजार कोरोना संक्रमित लोगों में से सिर्फ 35 लोगों को अस्पताल में भर्ती होने और 13 लोगों को ऑक्सीजन की जरुरत पड़ी है. इसके अलावा हॉस्पिटल में भर्ती होने के औसत दिन भी बेहद कम हैं.

    एक अनुमान जताते हुए उन्होंने कहा कि मान लीजिये, अगर देश में बुरे से बुरे हालात में रोजाना 10 लाख कोरोना केस भी आते हैं. तो इनमें से 35 हजार लोगों को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता होगी. वहीं 13 हजार लोगों को ऑक्सीजन सपोर्ट की जरुरत पड़ सकती है. जबकि अस्पताल में भर्ती होने के बाद स्वस्थ होने के दिनों में भी तेजी है, जो कि करीब 3 से 5 दिन है. वहीं डेल्टा वेरिएंट में यह समय करीब 10 दिन का था.

    डॉ एम विद्यासागर ने कहा कि कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने से देश की स्वास्थ्य सुविधाओं पर ज्यादा मार नहीं पड़ेगी. जैसे कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान देखने को मिला था. जब मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने और ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता ज्यादा थी.

    Tags: Coronavirus, Covid-19 Case, Omicron



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